चेक बाउंस का मामला पूरी तरह तारीख़ों पर टिका होता है। एक भी समय सीमा चूकने से सही दावा भी ख़ारिज हो सकता है, इसलिए चेक लौटते ही नोटिस भेज देना चाहिए। मैं शिकायतकर्ता और अभियुक्त, दोनों की ओर से ये मामले देखता हूं।
मैं किन मामलों में सहायता करता हूं
- धारा 138 का मांग नोटिस और परिवाद
- चेक बाउंस के मामलों में अभियुक्त की ओर से बचाव
- समझौते (कंपाउंडिंग) से मामले का निपटारा
- पैसे की वसूली के सिविल वाद और समरी सूट
चेक बाउंस: समय सीमाएं
- बैंक से चेक अनादरित होने की सूचना मिलने के 30 दिन के भीतर मांग नोटिस भेजें।
- नोटिस मिलने के बाद चेक देने वाले के पास भुगतान के लिए 15 दिन होते हैं।
- भुगतान न हो तो इन 15 दिनों के ख़त्म होने से एक महीने के भीतर धारा 142 के तहत परिवाद दायर करें।
अदालत क्या आदेश दे सकती है
यह अपराध दो वर्ष तक की क़ैद, या चेक राशि के दोगुने तक जुर्माने, या दोनों से दंडनीय है। धारा 143A के तहत अदालत मुक़दमा लंबित रहते चेक राशि के 20 प्रतिशत तक अंतरिम मुआवज़ा भी दिला सकती है।
चेक के बिना पैसे की वसूली
जहां पैसा कर्ज़, इनवॉइस या अनुबंध पर बकाया है, वहां वसूली का सिविल वाद दायर किया जा सकता है। लिखित अनुबंधों और परक्राम्य लिखतों पर दावों के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश XXXVII के तहत समरी सूट उपलब्ध है, जिसमें प्रतिवादी को बचाव के लिए अदालत से अनुमति लेनी पड़ती है।
पहले परामर्श में क्या लाएं
- चेक की प्रति और बैंक का रिटर्न मेमो
- भेजा या मिला नोटिस और उसकी डिलीवरी का प्रमाण
- कर्ज़ या लेनदेन से जुड़े दस्तावेज़, जैसे अनुबंध, इनवॉइस या चैट
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चेक बाउंस होने पर नोटिस कितने दिन में भेजना होता है?
नोटिस के बाद मुक़दमा कब दायर करें?
धारा 138 में क्या सज़ा हो सकती है?
क्या मुक़दमे के दौरान कुछ पैसा मिल सकता है?
मुझे चेक बाउंस का नोटिस मिला है, क्या करूं?
यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। हर मामले का परिणाम उसके अपने तथ्यों और लागू क़ानून पर निर्भर करता है।
यह जानकारी अंग्रेज़ी में: Cheque bounce and money recovery lawyer in Lucknow