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लखनऊ में सर्विस मैटर के वकील: सरकारी कर्मचारियों के मामले

राज्य, उसके विभागों, विश्वविद्यालयों, सहायता प्राप्त संस्थानों और भर्ती संस्थाओं से कर्मचारियों के विवाद, पहले जवाब से हाई कोर्ट तक।

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सेवा क़ानून मेरी प्रैक्टिस का बड़ा हिस्सा है। सरकारी नौकरी वैधानिक नियमों, शासनादेशों और दशकों के न्यायिक फ़ैसलों से चलती है, और ज़्यादातर विवाद इस बात पर जीते या हारे जाते हैं कि उन नियमों का पालन हुआ या नहीं। मैं आपके पद पर लागू नियम पढ़कर देखता हूं कि विभाग से कहां चूक हुई, और समय रहते सही फ़ोरम में मामला ले जाता हूं।

मैं किन मामलों में सहायता करता हूं

  • निलंबन, निलंबन की बहाली और जीवन निर्वाह भत्ता
  • कारण बताओ नोटिस, आरोप पत्र और विभागीय जांच
  • दंड आदेश: परिनिंदा, वेतनवृद्धि रोकना, पदावनति, सेवा से हटाना और बर्ख़ास्तगी, और इनके ख़िलाफ़ विभागीय अपील
  • पदोन्नति, वरिष्ठता सूची और सेवा अभिलेख में प्रतिकूल प्रविष्टि
  • वेतन निर्धारण, वेतनवृद्धि, बकाया और वेतन से वसूली
  • पेंशन, पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण
  • तबादले और तैनाती के आदेश
  • UPSESSB, UPPSC और UPSSSC जैसी संस्थाओं की भर्ती और चयन सूची के विवाद
  • संविदा, तदर्थ और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण
  • अनुकंपा नियुक्ति

समय सीमाएं जो मामला तय करती हैं

उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों के लिए नियम 11 के तहत दंड आदेश के ख़िलाफ़ अपील आदेश की सूचना मिलने से 90 दिन के भीतर करनी होती है। अधिकरण में क्लेम पिटीशन एक वर्ष के भीतर दायर करनी होती है। देर से की गई अपील से यह समय सीमा नहीं बढ़ती। कई मज़बूत मामले यहीं, गुण-दोष पर सुनवाई से पहले ही, ख़त्म हो जाते हैं।

पहले परामर्श में क्या लाएं

  • जिस आदेश या नोटिस को चुनौती देनी है, और वह मिलने की तारीख़
  • नियुक्ति पत्र और नवीनतम पदोन्नति या स्थायीकरण आदेश
  • आरोप पत्र, आपके जवाब और जांच रिपोर्ट, अगर हैं
  • पहले दिया गया कोई प्रत्यावेदन या अपील, जमा करने के प्रमाण के साथ
  • सर्विस बुक के संबंधित पन्ने और वह शासनादेश जिस पर विभाग भरोसा कर रहा है

विस्तार से पढ़ें: उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारी को आरोप पत्र मिला है? नियम क्या कहते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दंड आदेश के ख़िलाफ़ विभागीय अपील कितने दिन में करनी होती है?
उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम 11 के तहत आदेश की सूचना मिलने से 90 दिन के भीतर।
लोक सेवा अधिकरण में क्लेम पिटीशन की समय सीमा क्या है?
उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) अधिनियम, 1976 की धारा 5(1)(b)(i) के तहत एक वर्ष। अपील या प्रत्यावेदन में लगा समय तभी छोड़ा जाता है जब वह सेवा नियमों के अनुसार दायर हुआ हो, और अधिकरण क्लेम पिटीशन में देरी माफ़ नहीं कर सकता।
मेरा मामला किस फ़ोरम में जाएगा?
उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों के मामले उ.प्र. लोक सेवा अधिकरण, लखनऊ में; केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), लखनऊ बेंच में; और सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक व कर्मचारी, विश्वविद्यालय कर्मचारी और भर्ती के अभ्यर्थी अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में जाते हैं।
आरोप पत्र का जवाब देने के लिए कितना समय मिलता है?
जवाब की तारीख़ आरोप पत्र जारी होने से कम से कम 15 दिन बाद की होनी चाहिए। सूची में दिए दस्तावेज़ न मिले हों तो जवाब से पहले लिखित रूप में उनकी मांग करें।
क्या अधिकरण के आदेश को चुनौती दी जा सकती है?
हां, दोनों अधिकरणों के आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

यह जानकारी केवल सामान्य समझ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। हर मामले का परिणाम उसके अपने तथ्यों और लागू क़ानून पर निर्भर करता है।

यह जानकारी अंग्रेज़ी में: Service law advocate in Lucknow

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